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लेटने पर सांस फूलना (ऑर्थोपनिया) गंभीर संकेत, समय रहते कराएं जांच – डॉ. नवीन सिंह

 


बस्ती। लेटते समय सांस लेने में कठिनाई होना, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ऑर्थोपनिया कहा जाता है, एक गंभीर स्वास्थ्य संकेत हो सकता है। आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर, कटेश्वर पार्क के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि यह समस्या सामान्य नहीं है और इसके पीछे कई गंभीर कारण हो सकते हैं।

डॉ. सिंह के अनुसार, जब व्यक्ति लेटता है तो शरीर के निचले हिस्सों (पैर और पेट) में जमा तरल पदार्थ छाती की ओर आ जाता है, जिससे फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है और सांस लेने में दिक्कत होती है।

उन्होंने बताया कि इसके प्रमुख कारणों में कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर (CHF), फेफड़ों की पुरानी बीमारियां जैसे COPD या अस्थमा, फुफ्फुसीय शोफ (फेफड़ों में पानी भरना), तथा मोटापा या स्लीप एपनिया शामिल हैं।

उपचार और बचाव के उपाय बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इस समस्या का इलाज उसके मूल कारण पर निर्भर करता है। डॉक्टर द्वारा डिउरेटिक्स (पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं) और हृदय की कार्यक्षमता सुधारने वाली दवाएं दी जा सकती हैं।

उन्होंने जीवनशैली में सुधार पर जोर देते हुए कहा कि नमक का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर में पानी रोकता है। साथ ही, सोते समय सिर को ऊंचा रखकर या तकिया लगाकर सोना लाभदायक हो सकता है।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि यदि समस्या मोटापे के कारण है तो वजन कम करना आवश्यक है। वहीं, स्लीप एपनिया के मरीजों के लिए CPAP मशीन का उपयोग भी सहायक सिद्ध होता है।

इसके अतिरिक्त उन्होंने विटामिन डी 3 और बी12 के सेवन को भी उपयोगी बताया, जिससे शरीर की समग्र कार्यक्षमता बेहतर होती है।

योग और प्राणायाम की भूमिका पर जोर देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यदि नियमित रूप से भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम, कपालभाति प्राणायाम तथा सूक्ष्म व्यायाम किए जाएं, तो श्वसन तंत्र मजबूत होता है और इस प्रकार की समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है।

चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लेटते ही अचानक सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी हृदय रोग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लें।

अंत में डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि समय पर पहचान, सही उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है, इसलिए स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है।

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