गौ-सेवा ही सुशासन का आधारः निराश्रित गोवंश के संरक्षण में उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशील पहल
बस्ती : उत्तर प्रदेश के यशस्वी एवं लोकप्रिय माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी के दूरदर्शी एवं कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार 'गौ-सेवा' को केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करते हुए सतत कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण, संवर्धन एवं समुचित देखभाल के लिए व्यापक एवं बहुआयामी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेष देष का पहला ऐसा राज्य है जहा निराश्रित गोवंष के भरण पोषण के लिये सरकार द्वारा 50 रू० की दर से भरण पोषण की धनराषि उपलब्ध करायी जा रही है।
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गौ-संरक्षण नीति के अंतर्गत वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल तथा आवश्यक पशु-चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह व्यवस्था न केवल गोवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है. बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ कर रही है।
गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 5,446 गौशालाओं में 7,592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। यह अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली 24×7 कार्यरत रहकर गोवंश की सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित कर रही है।
'मुख्यमंत्री सहभागिता योजना' के माध्यम से सरकार ने गौ-संरक्षण को जनआंदोलन का रूप प्रदान किया है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1,67,065 गोवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार पशुपालकों को सुपुर्द किए गए हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक गोवंश के लिए ₹50 प्रतिदिन की दर से पोषण भत्ता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है। यह पहल न केवल गोवंश के संरक्षण में सहायक है, बल्कि पशुपालकों की आय वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जनपद बस्ती में जिला प्रशासन द्वारा गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में 63 गौ-आश्रय स्थल क्रियाशील है, जिनमें 5,888 गोवंश का संरक्षण एवं पालन-पोषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, 171 प्रगतिशील पशुपालकों ने सहभागिता योजना के अंतर्गत 252 गोवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम 1955 के अंतर्गत गोवंश की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। जीरो टॉलरेंस नीतिः गोवंश संरक्षण से संबंधित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
कुछ असामाजिक एवं निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का खण्डन करते हुये उपाध्यक्ष गोसेवा आयोग श्री महेश शुक्ल जी के द्वारा बताया गया कि गोसेवा के पदाधिकारियो के द्वारा गौआश्रय स्थलो का नियमित भ्रणण करते हुये निरन्तर पैनी निगाह रखी जा रही है और कोई भी अनियमितता प्राप्त हाने पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। इस समय कतिपय सन्त वेस धारी छदमधर्म प्रचारको के द्वारा भ्रमक सूचनाये फैलाकर जनमानस को भ्रमित करने का कुतसित प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि निराश्रित गोवंश की सेवा एवं संरक्षण के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। राज्य सरकार गौ वंश के प्रति अपनी संवेदनशील, मानवीय एवं समर्पित दृष्टि के साथ सुशासन के सिद्धांतों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।


Post a Comment