पिपरीडीह रेलवे फाटक व छोटी कम्हरिया अंडरब्रिज की मांग को लेकर आप ने किया धरना-प्रदर्शन, DRM को सौंपे गए दो ज्ञापन
मऊ।आम आदमी पार्टी, मऊ के जिलाध्यक्ष विक्रम जीत सिंह के नेतृत्व में ग्राम सभा पिपरीडीह एवं छोटी कम्हरिया क्षेत्र की गंभीर जनसमस्याओं को लेकर पिपरीडीह रेलवे स्टेशन परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान उत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए।
इस धरना-प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ ग्राम पिपरीडीह के प्रधान रामप्रवेश यादव, पिपरीडीह के सैकड़ों ग्रामीण एवं छोटी कम्हरिया क्षेत्र के बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में रेलवे प्रशासन से जनहित में त्वरित एवं ठोस कार्रवाई की मांग की।
पहला ज्ञापन ग्राम सभा पिपरीडीह में स्थित रेलवे फाटक संख्या C-6 को पुनः चालू किए जाने अथवा वहां शीघ्र अंडरपास/सबवे निर्माण कराए जाने की मांग से संबंधित था। दूसरा ज्ञापन छोटी कम्हरिया क्षेत्र में अंडर रेलवे ब्रिज/सबवे निर्माण को लेकर दिया गया, जहां किसी भी प्रकार की सुरक्षित रेलवे क्रॉसिंग उपलब्ध न होने के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है।
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष विक्रम जीत सिंह ने कहा—
“पिपरीडीह का रेलवे फाटक C-6 वर्षों से ग्रामीणों की जीवनरेखा रहा है। इसे बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बंद कर देना आम जनता के साथ अन्याय है। बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती, मरीजों का इलाज और आपातकालीन सेवाएं सब बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। वहीं छोटी कम्हरिया में अंडरब्रिज न होना लगातार जानलेवा हादसों को न्योता दे रहा है। यह मुद्दा अब केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और जीवन के अधिकार का बन चुका है।”
ग्राम प्रधान पिपरीडीह रामप्रवेश यादव ने भी धरना-प्रदर्शन के दौरान कहा—
“रेलवे फाटक बंद होने से हमारे गांव की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। बाजार, स्कूल और अस्पताल सब कुछ पास होते हुए भी दूर हो गया है। हम वर्षों से इस समस्या को झेल रहे हैं। आज पूरा गांव एकजुट होकर यह मांग कर रहा है कि या तो फाटक फिर से खोला जाए या तत्काल अंडरपास बनाया जाए।”
विक्रम जीत सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इन दोनों जनसमस्याओं पर शीघ्र ठोस, सकारात्मक और समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन, धरना-प्रदर्शन एवं अन्य जनआंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।
धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और जनहित के मुद्दों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया।


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