Basti News: भारतीय मजदूर संघ का बस्ती में विरोध प्रदर्शन, 18 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर श्रमिक हितों पर उठाई आवाज
बस्ती : भारतीय मजदूर संघ द्वारा बुधवार को देशव्यापी आह्वान के तहत जिला मुख्यालय पर विरोध दिवस के रूप में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उपरांत जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
यह ज्ञापन हाल ही में 6, 7 एवं 8 फरवरी 2026 को पुरी (उड़ीसा) में सम्पन्न भारतीय मजदूर संघ के 21वें अखिल भारतीय त्रिवार्षिक अधिवेशन में पारित प्रस्तावों तथा कर्मचारियों से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं के समाधान हेतु तैयार किया गया है।
संरक्षक उमेश चंद्र मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश का श्रमिक वर्ग महंगाई, असुरक्षित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अभाव से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय मजदूर संघ सदैव राष्ट्रहित और श्रमिक हित को साथ लेकर चलता है। आज आवश्यकता है कि सरकार श्रम कानूनों को पूरी निष्ठा से लागू करे और ठेका व असंगठित श्रमिकों को भी सम्मानजनक सुरक्षा प्रदान करे।
उन्होंने EPS-95 पेंशन वृद्धि, श्रमिकों के स्थायीकरण तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार की मांग को अत्यंत आवश्यक बताया।
जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता ने कहा कि विभिन्न वर्गों के कर्मचारी — जैसे आशा, आंगनबाड़ी, संविदा कर्मी, सफाई कर्मचारी और दिहाड़ी मजदूर — लंबे समय से उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए। संविदा कर्मियों को समय पर वेतन, सेवा सुरक्षा और स्पष्ट नियमावली मिलनी ही चाहिए। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने तथा निकाय कर्मचारियों के समायोजन जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
जिला मंत्री राहुल श्रीवास्तव ने 18 सूत्रीय ज्ञापन की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल मांग पत्र नहीं बल्कि श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन का आधार है।
उन्होंने कहा कि आज दिहाड़ी मजदूर, ई-रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी दुकानदार और ग्रामीण श्रमिक सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। इनके लिए न्यूनतम पारिश्रमिक तय किया जाना और सुरक्षा कवच प्रदान करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने 108 एवं 102 एंबुलेंस के बर्खास्त कर्मियों की बहाली, पुरानी पेंशन बहाली तथा आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए ठोस नीति बनाने की मांग को प्रमुख बताया।
ज्ञापन में सरकार से निम्न प्रमुख मांगें की गईं:
1. आशा कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाये व उन्हें प्रोत्साहन राशि के स्थान पर मानदेय दिया जाये।
2. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों/सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करें और मानदेय में वृद्धि की जाये।
3. एनएचएम के सभी संविदा कर्मियों की बीमा, स्थानांतरण, वेतन विसंगतियों की समस्याओं का समाधान किया जाये।
4. आयुक्त व निबन्धक सहकारिता उ.प्र. द्वारा निर्गत वेतनमान पुनरीक्षण परिपत्रांक सी-69, दि.07/01/2022 की विसंगतियों का निराकरण करते हुए 16 बैंकों के वेतनमान पुनरीक्षण करने एवं जिला सहकारी बैंकों में सहायक महाप्रबंधक के पद का सृजन किया जाये।
5. बैंकिंग उद्योग में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाये।
6. वर्ष 2001 से पूर्व के संविदा कर्मचारियों को नियमित करने व उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मृतक आश्रितों को नौकरी देने के आदेश का अनुपालन कराया जाये।
7. निकायों में वर्षों से वाहन चालक का कार्य करने वाले समस्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ड्राइवर के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाये।
8. निकायों में पं. दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस योजना को लागू किया जाये।
9. पटरी रेहाड़ी दुकानदारों को समुचित स्थान दिया जाए एवं उनका उत्पीड़न बंद किया जाए।
10. ई-रिक्शा, आटो को स्टैंड दिया जाए एवं पुलिस उत्पीड़न बंद किया जाए।
11. ई-रिक्शा चालक, आटो चालक, धोबी, दर्जी, बढ़ई, लुहार, मोची, कुम्हार को मजदूर की श्रेणी प्रदान की जाए और सामाजिक सुरक्षा से आवृत किया जाए।
12. कृषि ग्रामीण एवं दिहाड़ी मजदूरों का पारिश्रमिक तय किया जाए एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
13. संविदा/निविदा सफाई कर्मचारियों को रुपये 18000/- का वेतन दिया जाए एवं उन्हें नियमित किया जाए।
14. 108,102 एंबुलेंस के बर्खास्त कर्मियों की बहाली करो एवं ड्राफ्त, धन उगाही को बंद करो।
15. संविदा/आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियमावली बनाई जाए।
16. मिड-डे मील के कर्मचारियों का मानदेय रुपये 10000/- किया जाए।
17. पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
18. पत्रकारों/श्रमजीवी पत्रकारों को सुरक्षा बीमा एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ द्वारा भी प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। इसमें SNA स्पर्श से वेतन भुगतान को पृथक करने, स्वास्थ्य बजट में वृद्धि, IPHS मानकों के अनुसार पद सृजन, वेतन नीति निर्धारण, सामाजिक सुरक्षा, सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों के समावेशन, मानव संसाधन नीति निर्माण एवं स्थानांतरण नीति लागू कर गृह जनपद में तैनाती की मांग की गई।
मंडल संयोजक संजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारी लंबे समय से वेतन विसंगतियों, असुरक्षित सेवा शर्तों और अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि SNA स्पर्श जैसी जटिल वेतन भुगतान प्रणाली के कारण कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पाता, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक संकट उत्पन्न होता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वेतन भुगतान प्रणाली को सरल बनाया जाए तथा स्वास्थ्य बजट में वृद्धि कर कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए।
जिला संयोजिका अनीता चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले संविदा कर्मचारी आज स्वयं असुरक्षा की स्थिति में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि IPHS मानकों के अनुरूप पद सृजन, महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण तथा सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गृह जनपद में तैनाती की नीति लागू करने की भी मांग की, जिससे कर्मचारियों को पारिवारिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सके।
जिलाध्यक्ष सुधाकर पाण्डेय ने कहा कि सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों का शोषण बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाना चाहिए तथा मानव संसाधन नीति बनाकर कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित कर कर्मचारियों को स्थायित्व प्रदान करना समय की आवश्यकता है।
महामंत्री जन्मेजय उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने वेतन नीति निर्धारण, स्थानांतरण नीति लागू करने एवं सेवा शर्तों को स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि जब तक कर्मचारियों को सम्मानजनक सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की परिकल्पना अधूरी रहेगी। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
इस प्रदर्शन में संजय मणि त्रिपाठी, विक्रम प्रताप सिंह, निरंकुश शुक्ला, ज्ञांती सिंह, रुद्र नारायण रॉय, बरखा गौड़, उमेश चंद्र चौधरी, कृष्णकांत कुशवाहा, अमित प्रबोध, ज्योति चौहान, रविन्द्र यादव, पूनम, रीतिका, सर्वेश, रामप्रकाश, रवींद्र चौधरी, रविप्रकाश सिंह, संजय सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रमिकों, कर्मचारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की।


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