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जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए समय रहते भगवान की भक्ति और सत्संग का लेना चाहिए सहारा- आचार्य डॉ महेश दास जी महाराज



श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सुखदेव जन्म और परीक्षित श्राप प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन


बस्ती। ग्राम मेहनौना में चल रही सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा पंडाल में सुबह से ही भक्ति का माहौल रहा। मुख्य यजमान हनुमान प्रसाद दुबे व सुमित्रा देवी की उपस्थिति में विधिवत पूजन के बाद कथा का शुभारंभ हुआ।


कथावाचक महेश दास जी महाराज ने दूसरे दिन श्रीमद्भागवत के महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने सुखदेव जी के जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार वे जन्म से ही वैराग्यवान और ब्रह्मज्ञानी थे। इसके बाद उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप मिलने का प्रसंग विस्तार से बताया। महाराज ने कहा कि श्रृंगी ऋषि के श्राप के बाद राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह त्यागकर गंगातट पर जाकर सात दिन तक भागवत कथा श्रवण करने का संकल्प लिया।


उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए समय रहते भगवान की भक्ति और सत्संग का सहारा लेना चाहिए। कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।


संगीत टीम में सियाराम दास जी, राधेश्वर शरण, सीताराम शरण, संतोष शरण, श्रीकांत शरण, विनोद दास, लक्ष्मण दास, राकेश दास व राणा दास ने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। आयोजन समिति के अनुसार कथा प्रतिदिन निर्धारित समय पर आयोजित की जा रही है।

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